Hazaribagh : इचाक प्रखंड के करियातपुर गांव में वर्षों पुरानी पीतल बर्तन निर्माण की परंपरा को नई तकनीक और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए MSME की स्फूर्ति योजना के तहत स्थापित करियातपुर ब्रास मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का उद्घाटन क्षेत्रीय विधायक अमित कुमार यादव और मुखिया मोदी कुमार ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और दीप जला कर किया.
आधुनिक मशीनों से लैस है क्लस्टर
केंद्र सरकार के सहयोग से वर्ष 2023 में तैयार इस क्लस्टर में रोलिंग मिल, हाइड्रोलिक प्रेस, सर्किल कटिंग मशीन, पॉलिश मशीन, मेल्टिंग फर्नेस, री-हीटिंग फर्नेस, लेथ मशीन सहित कई अत्याधुनिक मशीनें और उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. क्लस्टर का उद्देश्य पारंपरिक बर्तन उद्योग को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उत्पादन बढ़ाना, आकर्षक और फैंसी बर्तनों का निर्माण करना तथा कारीगरों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करना है. उद्घाटन के बाद अतिथियों ने क्लस्टर का निरीक्षण किया और पीतल, ब्रास और एल्यूमिनियम के बर्तन निर्माण में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों की जानकारी ली.
वर्षों पुरानी है करियातपुर की पहचान
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि करियातपुर वर्षों से पीतल के बर्तन निर्माण के लिए प्रसिद्ध रहा है. यहां कसेरा समाज की आजीविका का प्रमुख आधार बर्तन निर्माण और व्यवसाय रहा है. आधुनिक क्लस्टर की स्थापना से इस पारंपरिक उद्योग को नई दिशा मिलेगी.
करियातपुर का बर्तन उद्योग पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा : विधायक
मुख्य अतिथि विधायक अमित कुमार यादव ने कहा कि विधायक बनने के बाद उन्हें करियातपुर के छोटे और पारंपरिक उद्योगों को करीब से देखने का अवसर मिला. यहां के कारीगरों की मेहनत और कौशल को देखते हुए सरकार से आधुनिक उद्योग स्थापित कराने का प्रयास किया गया, जो अब साकार हो गया है. उन्होंने कहा कि हमने यहां फैक्ट्री बनाकर यह साबित कर दिया है कि हम नौकरी लेने वालों में नहीं, बल्कि नौकरी देने वालों में हैं. प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुशल व्यक्ति कभी बेरोजगार नहीं रहता और आने वाले समय में करियातपुर के पीतल उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा.
कारीगरों को मिलेगा आधुनिक तकनीक और बाजार
वरिष्ठ नेता बटेश्वर मेहता ने कहा कि कसेरा समाज शुरू से ही मेहनतकश रहा है. संसाधनों की कमी के बावजूद इस समाज ने बर्तन उद्योग को जीवित रखा. अब क्लस्टर की स्थापना से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, आधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी और कारीगरों को बेहतर बाजार मिलने से इस पारंपरिक उद्योग को नई पहचान मिलेगी.
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