टाटा लीज रिन्यूअल से पहले विस्थापितों के अधिकार की मांग तेज, 1908-1937 खतियान लागू करने पर अड़ा मंच

Jamshedpur: झारखंड मूलवासी अधिकार मंच की ओर से शुक्रवार को जिले के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई कि टाटा लीज...

Jamshedpur: झारखंड मूलवासी अधिकार मंच की ओर से शुक्रवार को जिले के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई कि टाटा लीज नवीकरण से पहले 18 मौजा के विस्थापितों को नौकरी दी जाए. इसके साथ ही मूलवासी विस्थापितों का सर्वे कराकर प्रमाण-पत्र जारी करने की भी मांग उठाई गई है.

1908-1937 के खतियान को मान्यता देने की मांग

झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि वर्ष 1996 का सर्वे रद्द किया जाए. उन्होंने मांग की कि रैयतों के लिए 1908 और 1937 के खतियान को ही मान्यता दी जाए. उनका आरोप है कि 1996 के सर्वे में कई वास्तविक रैयतों के नाम छूट गए, जबकि फर्जी लोगों को शामिल कर लिया गया.

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विस्थापितों का नए सिरे से हो सर्वे

हरमोहन महतो ने कहा कि टाटा स्टील की स्थापना के समय 18 मौजा के हजारों परिवार विस्थापित हुए थे, लेकिन आज तक सभी को नौकरी और मुआवजा नहीं मिला. उन्होंने मांग की कि लीज नवीकरण से पहले कंपनी हर विस्थापित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी दे. साथ ही मूलवासी-विस्थापितों का नए सिरे से सर्वे कर प्रमाण-पत्र जारी किया जाए.

पहले भी सौंपा जा चुका है ज्ञापन

हरमोहन महतो ने बताया कि इन मांगों को लेकर पूर्व में भी डीसी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया था. यदि इसकी प्रतिलिपि सरकार को भेजी गई, तो अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो मंच आंदोलन करने को बाध्य होगा.

ज्ञापन सौंपने वालों में हरमोहन महतो के अलावा दशरथ महतो, बासुदेव महतो, जगदीश सरदार, मंगला महतो समेत 18 मौजा के दर्जनों विस्थापित शामिल थे. उपायुक्त ने मंच को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

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