Hazaribagh: जिले के पदमा और कटकमसांडी थाना क्षेत्र से पुलिसिया लापरवाही और संवेदनहीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.21 वर्षीय युवक की हत्या के बाद, जहां पुलिस ने पहचान सुनिश्चित किए बिना उसे लावारिस घोषित कर अंतिम संस्कार कर दिया, वहीं पीड़ित परिजनों को न्याय के लिए हफ्तों तक दो थानों के चक्कर काटने पर मजबूर होना पड़ा.
बताया जाता है कि कटकमसांडी थाना क्षेत्र के असधीर गांव निवासी सूरज कुमार राम, पिता रंजीत राम, 24 मार्च को अपने दोस्त नकुल भुईयां के बुलावे पर पदमा थाना क्षेत्र के केदारुत गांव रामनवमी जुलूस देखने गया था.दोनों की दोस्ती चरही स्थित ईंट भट्ठे में काम करने के दौरान हुई थी.पारिवारिक संबंध भी थे, क्योंकि नकुल की बहन की शादी असधीर गांव में ही हुई है.परिजनों के मुताबिक,25 मार्च की रात करीब आठ बजे सूरज ने अपनी मां से आखिरी बार बात की थी. इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया. शुरुआत में परिवार को लगा कि वह किसी निजी कारण से बाहर होगा, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी चिंता बढ़ती गई.
थाना में गुमशुदगी का मामला दर्ज
इसी बीच, 31 मार्च को पदमा थाना पुलिस ने केदारुत रेलवे पटरी के पास एक अज्ञात युवक का शव बरामद किया.हैरानी की बात यह रही कि शव की पहचान सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया.पोस्टमार्टम के बाद शव को 72 घंटे तक मुर्दा कल्याण समिति के पास रखा गया और फिर उसे लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया.दूसरी ओर,बेटे की तलाश में भटक रहे परिजनों के आवेदन पर 14 अप्रैल को कटकमसांडी थाना में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया.शक के आधार पर जब वे केदारुत गांव पहुंचे और ग्रामीणों को सूरज की तस्वीर दिखाई, तो स्थानीय लोगों ने हत्या की आशंका जताई.
इसके बाद परिजन पदमा थाना पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि मामला कटकमसांडी का है. वहीं कटकमसांडी थाना पहुंचने पर पुलिस ने घटना स्थल पदमा बताते हुए फिर उन्हें वापस भेज दिया. दोनों थानों के इस टालमटोल रवैये से परिजन मानसिक रूप से टूट गए और न्याय की आस में दर-दर भटकते रहे.अंततः जब मामला वरीय पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा, तब 18 अप्रैल को पदमा थाना में हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई. प्राथमिकी में नकुल भुईयां, पवन कुमार भुईयां, अभिषेक कुमार और बेबी देवी को नामजद आरोपी बनाया गया है.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ युवक की हत्या के बाद उसकी पहचान में लापरवाही बरती गई, तो दूसरी ओर परिजनों को समय पर न्याय दिलाने में भी घोर उदासीनता दिखाई गई.अब सवाल यह है कि आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा. वहीं, घटना में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी, यह भी बड़ा प्रश्न बना हुआ है.
