RANCHI: झारखंड के विकास के दावों और हकीकत के बीच एक ऐसी खाई नजर आ रही है, जिसे भरने के लिए पैसा तो है, पर विकास कार्यों में खर्च करने की कमी दिखती है. जिस राज्य की जनता सड़क, बिजली, और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, वहां के 19 सांसदों ने अपने फंड का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं किया है. चौंकाने वाला खुलासा यह है कि फंड यूटिलाइजेशन के मामले में राज्य के 8 सांसद लो-परफॉरमर की श्रेणी में हैं, जबकि एक माननीय तो पूरी तरह इनेक्टिव यानी निष्क्रिय मोड में चले गए हैं.
फंड का गणित: करोड़ों की राशि, खर्च करने में सुस्ती
सांसद निधि का मकसद क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान करना होता है, लेकिन झारखंड के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. स्पष्ट है कि लगभग 44% राशि अब भी सरकारी फाइलों और बैंक खातों में धूल फांक रही है. यह 99 करोड़ की राशि राज्य के सुदूर इलाकों में सैकड़ों स्कूल भवन, चापाकल या स्वास्थ्य केंद्र बनवा सकती थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है.
परफॉरमेंस की रिपोर्ट कार्ड: कौन कहां खड़ा है
- लो-परफॉरमर (सबसे फिसड्डी): 8 सांसदों ने 42.1% से भी कम राशि खर्च की है. विकास के पायदान पर ये सबसे नीचे हैं.
- इनेक्टिव (निष्क्रिय): एक सांसद ने तो फंड छूना भी मुनासिब नहीं समझा. उनकी रिपोर्ट पूरी तरह शून्य की ओर इशारा करती है.
- मीडियम परफॉरमर: 2 सांसदों ने 50 से 70% के बीच खर्च किया है.
- टॉप परफॉरमर: 8 सांसद ऐसे भी हैं जिन्होंने सक्रियता दिखाते हुए 70 से 90% राशि जनहित में लगाई है.
देश में नौवें पायदान पर झारखंड
हैरानी की बात यह है कि विकास की रेस में झारखंड के सांसद देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में नौवें स्थान पर हैं. जहां नागालैंड (प्रथम), अरुणाचल प्रदेश (द्वितीय) और मिजोरम (तृतीय) जैसे छोटे और दुर्गम राज्यों के सांसदों ने शत-प्रतिशत राशि खर्च करने में तत्परता दिखाई है, वहीं झारखंड के माननीय पिछड़ गए हैं. उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के बाद झारखंड का नंबर आता है, जो यह दर्शाता है कि यहां फंड मैनेजमेंट और कार्यान्वयन की प्रक्रिया कितनी सुस्त है.
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बताते चलें कि राज्य के लोकसभा और राज्यसभा के 19 सांसदों को क्षेत्र विकास के लिए 225.8 करोड़ फंड एलोकेट किए गए हैं. इसमें से 126.8 करोड़ राशि ही कर्च हुई है. शेष 98 करोड़ 93 लाख 20 हजार 404 रुपए खर्च किया जाना बाकी है.
