Ranchi : Prabhat Kumar के लिए ‘पुत्र धर्म’ और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच की लड़ाई भारी पड़ गई है. झारखंड सरकार ने जामताड़ा के तत्कालीन अधिसूचित भूमि सुधार उप समाहर्ता (LRDC) प्रभात कुमार के खिलाफ दी गई ‘निंदन’ की सजा को बरकरार रखा है.
समय पर योगदान नहीं देने का मामला
मामला उस समय का है जब प्रभात कुमार का तबादला जामताड़ा किया गया था. उस दौरान वह पाकुड़ में पदस्थापित थे. आरोप है कि उन्होंने तय समय पर नई जगह पर योगदान नहीं दिया और मुख्यालय में उपस्थिति भी दर्ज नहीं कराई.
माता-पिता की बीमारी का दिया हवाला
अपील में Prabhat Kumar ने कहा कि उनके वृद्ध माता-पिता रांची में कोविड से जूझ रहे थे. पाकुड़ से रांची की दूरी और छुट्टी नहीं मिलने के कारण वे उनकी देखभाल नहीं कर पाए. उन्होंने इसे अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि माता-पिता के इलाज के लिए उनका साथ रहना जरूरी था.
डाक से सूचना भेजने का दावा
अधिकारी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी स्थिति की जानकारी विभाग को सामान्य डाक के माध्यम से भेजी थी. हालांकि विभाग के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. अधिकारी ने कहा कि डाक की पावती भी गुम हो गई.
सरकार ने अपील खारिज की
सरकार ने अपील की समीक्षा के बाद कहा कि अधिकारी की ओर से कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया. विभाग ने स्पष्ट किया कि समय पर योगदान नहीं देना और मुख्यालय में अनुपस्थित रहना अनुशासनहीनता है.
प्रमोशन पर भी पड़ सकता है असर
सरकार ने प्रभात कुमार के खिलाफ दी गई ‘निंदन’ की सजा को बरकरार रखा है. इस फैसले का असर उनके भविष्य के प्रमोशन और सेवा रिकॉर्ड पर पड़ सकता है.
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