DSPMU में फूटा छात्रों का आक्रोश, पुलिस लाठीचार्ज के बीच सुलग उठा विश्वविद्यालय परिसर, पूरा कैंपस छावनी में तब्दील

Ranchi: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में सोमवार को हालात उस वक्त पूरी तरह रणक्षेत्र में तब्दील हो गए, जब छात्र...

Massive Student Protest at DSPMU Against Cluster System
Massive Student Protest at DSPMU Against Cluster System

Ranchi: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में सोमवार को हालात उस वक्त पूरी तरह रणक्षेत्र में तब्दील हो गए, जब छात्र अपनी बुनियादी हकूक की लड़ाई को लेकर सड़कों पर उतर आए. अकादमिक भ्रष्टाचार, मनमाने फैसलों और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले प्रशासनिक रवैये के खिलाफ छात्रों का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया. प्रशासनिक भवन के बाहर छात्रों के हुजूम ने कुलपति का पुतला फूंककर अपने तेवर साफ कर दिए, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच हुई भिड़ंत और लाठीचार्ज ने इस पूरे आंदोलन को एक बड़े जनआंदोलन की शक्ल दे दी है. इस समय पूरा कैंपस छावनी में तब्दील है.और हवा में तनाव की भारी चादर लिपटी हुई है.

सीटों में कटौती से भविष्य पर मंडराया संकट

विश्वविद्यालय प्रशासन के एकाधिकारवादी और अदूरदर्शी फैसलों के कारण इस सत्र में छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. छात्रों का आरोप है कि ट्रेडिशनल और वोकेशनल पाठ्यक्रमों विशेषकर बीसीए, बीबीए और बीकॉम जैसे रोजगारपरक कोर्सों में सुनियोजित तरीके से 20 से 40 प्रतिशत तक सीटें कम कर दी गई हैं. झारखंड जैसे आदिवासी बहुल और पिछड़े राज्य के गरीब, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे महंगे प्राइवेट कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की भारी-भरकम फीस भरने में पूरी तरह असमर्थ हैं. ऐसे में सरकारी संस्थानों में सीटों पर कैंची चलना इन युवाओं के सपनों का गला घोंटने जैसा है. छात्रों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकारी विश्वविद्यालय ही उच्च शिक्षा के दरवाजे आम बच्चों के लिए बंद कर देंगे, तो उन्हें मजबूरन पलायन कर दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ेगा.

नियमों की अनदेखी से भड़का रोष

केवल सीटों की कटौती ही नहीं, बल्कि हाल ही में जारी नामांकन सूचियों में राज्य सरकार की आरक्षण नीति की धज्जियां उड़ाए जाने का भी गंभीर मामला सामने आया है. छात्र संगठनों का कहना है कि रोस्टर और आरक्षण के प्रावधानों का पारदर्शी तरीके से पालन न किए जाने के कारण वंचित वर्गों के मेधावी छात्र अपने बुनियादी अधिकारों से महरूम हो रहे हैं. छात्रों की मांग है कि पूरी नामांकन सूची को रद्द कर आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नए सिरे से सूचियां जारी की जाएं, ताकि सामाजिक न्याय की मूल भावना सुरक्षित रह सके.

पुतला दहन से लेकर कुलपति की गाड़ी पर फेंकी गई स्याही

छात्रों की मांग थी कि कुलपति खुद संवाद स्थापित करने के लिए आएं और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान निकालें. मगर जब संवाद के सारे रास्ते बंद नजर आए, तो आक्रोशित छात्रों ने प्रशासनिक भवन को घेर लिया. विरोध की आग इतनी तीव्र थी कि छात्रों ने प्रशासनिक गेट के बाहर कुलपति का पुतला दहन किया और विरोध स्वरूप गाड़ी पर स्याही फेंककर अपनी नाराजगी दर्ज कराई.स्थिति के बेकाबू होते ही प्रशासन ने लाठीचार्ज का सहारा लिया, जिससे कई छात्र चोटिल हो गए. 

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छात्रों की 10 सूत्री मुख्य मांगें

  • सीटों की बहाली: ट्रेडिशनल एवं वोकेशनल विभागों में घटाई गई सीटों की संख्या को तत्काल पूर्ववत किया जाए या उनमें वृद्धि की जाए.
  • स्थायी शिक्षक नियुक्ति: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में लंबित पड़ी शिक्षक नियुक्तियों को अविलम्ब शुरू कर स्थायी फैकल्टी बहाल की जाए.
  • फीस में रियायत: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षण शुल्क अनारक्षित श्रेणी की तुलना में 50 प्रतिशत कम किया जाए.
  • छात्रवृत्ति की सुगमता: एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर समयबद्ध वितरण सुनिश्चित किया जाए.
  • विशेष कार्यशाला: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के अंतर्गत शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक माह की विशेष कार्यशाला का आयोजन हो.
  • कॉमर्स और बीबीए में फैकल्टी: कॉमर्स एवं बीबीए विभाग के आधुनिक विषयों के सुचारू संचालन के लिए योग्य स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की जाए.
  • बैकलॉग और रोस्टर: विश्वविद्यालय में एससी-एसटी रोस्टर का कड़ाई से पालन कराते हुए सभी बैकलॉग पदों पर पारदर्शी और स्थायी भर्ती शुरू की जाए.
  • निःशुल्क रिमेडियल कोचिंग: एससी-एसटी तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु निःशुल्क रिमेडियल कोचिंग चलाई जाए.
  • सेमिनार और बौद्धिक मंथन: एससी-एसटी सेल के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, मुद्दों और अधिकारों पर राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर के सेमिनार आयोजित किए जाएं.
  • पीएचडी नियमावली: शोधार्थियों के हित में स्पष्ट पीएचडी ऑर्डिनेंस (नियमावली) तैयार कर आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पारित कराया जाए.

आर-पार की लड़ाई का ऐलान

छात्र अब अपने अधिकारों को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं हैं. छात्र संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्दबाजी में केवल गोल-मटोल आश्वासन देने के बजाय इन सभी दस बिंदुओं पर लिखित और समयबद्ध निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले लेगा.

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