निशांत कुमार का उदय और सोशल इंजीनियरिंग की नई इबारत
News Wave Desk : बिहार की राजनीति ने गुरुवार को एक नए अध्याय में प्रवेश किया. ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने 32 नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. यह विस्तार केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए द्वारा की गई एक अभेद्य किलाबंदी के रूप में देखा जा रहा है.

निशांत कुमार की एंट्री और नीतीश की विरासत
इस कैबिनेट विस्तार का सबसे चौंकाने वाला और चर्चा का केंद्र रहा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का मंत्रिमंडल में शामिल होना. राजनीति से दूर रहने वाले निशांत का जेडीयू कोटे से मंत्री बनना यह संकेत देता है कि नीतीश कुमार की विरासत अब औपचारिक रूप से सत्ता के केंद्र में स्थापित हो चुकी है.
शपथ ग्रहण में एनडीए के सभी पांचों घटक दलों बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी (आर), और आरएलएम के प्रतिनिधियों को शामिल कर ऑल इज वेल का संदेश दिया गया. जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए बीजेपी से रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा और दिलीप जायसवाल जैसे दिग्गजों को जगह मिली, तो जेडीयू ने श्रवण कुमार, अशोक चौधरी और लेसी सिंह जैसे पुराने भरोसेमंद चेहरों पर फिर से दांव लगाया है.
युवा जोश और अनुभवी चेहरों का संगम
मंत्रिमंडल में श्रेयसी सिंह और लखेंद्र कुमार रौशन जैसे युवा चेहरों के साथ साथ डॉ. संतोष कुमार सुमन और भगवान सिंह कुशवाहा जैसे अनुभवी नामों को शामिल किया गया है. सीमांचल से लेकर मिथिलांचल और मगध से लेकर शाहाबाद तक, हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देकर सम्राट चौधरी ने एक समावेशी सरकार की तस्वीर पेश की है.
सियासी भविष्य की नींव
पिछले महीने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के 22 दिनों बाद हुए इस विस्तार ने बिहार की सत्ता में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है. प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि केंद्र के लिए बिहार का यह नया प्रयोग बेहद महत्वपूर्ण है. अब चुनौती इन 32 दिग्गजों के कंधों पर है कि वे डबल इंजन की रफ्तार को धरातल पर कैसे उतारते हैं.
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