Ranchi: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने प्रदेश के सभी सिविल सर्जनों को सख्त निर्देश जारी करते हुए दो टूक शब्दों में चेताया है कि इलाज में थोड़ी सी भी कोताही, दवाओं की किल्लत या ड्यूटी से गायब रहने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा. सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है कि हर मरीज की जान अमूल्य है और उसे हर हाल में बचाना है.
मलेरिया से लेकर सर्पदंश तक पर पैनी नजर
विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में साफ किया गया है कि इस दौरान मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, हैजा, डायरिया, टाइफाइड, वायरल फीवर, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, जापानी इंसेफेलाइटिस और सर्पदंश जैसी गंभीर समस्याएं अचानक बढ़ जाती हैं. इन तमाम विसंगतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया है कि किसी भी जिले के मरीजों को इलाज के लिए भटकना न पड़े. ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को अभी से पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद रहने का फरमान जारी कर दिया गया है.
बाल रोग वार्डों पर विशेष फोकस
मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वायरल बुखार, निमोनिया और डायरिया से जूझते बच्चों के लिए बाल रोग वार्ड , एसएनसीयू और एनबीएसयू पूरी तरह सक्रिय रहने चाहिए.अस्पतालों में नेबुलाइजेशन की दवाइयों, ऑक्सीजन और कनिष्ठ चिकित्सकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. यदि किसी भी अस्पताल में संसाधनों की हल्की सी भी कमी महसूस होती है, तो संबंधित सिविल सर्जन को तत्काल इसकी सूचना उच्च स्तर पर देने को कहा गया है, ताकि बिना किसी प्रशासनिक देरी के राहत पहुंचाई जा सके.
गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की सेहत का खास ख्याल
विशेषकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों और बुजुर्गों की सेहत की कड़ी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं. यदि किसी स्थानीय अस्पताल में जटिल मामलों का इलाज संभव न हो, तो बिना समय गंवाए मरीज को उच्च संस्थान में रेफर किया जाए और परिजनों को पूरी स्थिति से अवगत कराकर उनका भरोसा जीता जाए.इसके अलावा, एम्बुलेंस सेवाओं को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया है. जब तक 108 एम्बुलेंस सेवा की नई एजेंसी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक सभी सिविल सर्जन खुद सरकारी एम्बुलेंसों की सीधी निगरानी करेंगे, ताकि वक्त पर मरीज अस्पताल पहुंच सकें.
फॉगिंग, स्वच्छता और जनप्रतिनिधियों की तरह रोज सुबह समीक्षा
मलेरिया और डेंगू के प्रकोप को रोकने के लिए प्रभावित जिलों में बड़े पैमाने पर फॉगिंग, इनडोर रेजिडुअल स्प्रे , मच्छरदानी वितरण, लार्वा नियंत्रण और स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति और पानी के क्लोरीनीकरण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. मंत्री ने कहा कि हम बदनामी से नहीं डरते, हमारी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है.जनता का जो भरोसा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा है, उसे किसी भी कीमत पर कम नहीं होने दिया जाएगा. अनुशासनहीनता या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है.
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उपद्रवियों और लापरवाही करने वालों को चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग ने अपने कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए यह भी चेताया है कि यदि कोई असामाजिक तत्व अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा डालने, डॉक्टरों या स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने का प्रयास करता है, तो जिला प्रशासन तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करे.
डॉक्टरों और जीवनरक्षक दवाओं की पुख्ता व्यवस्था
मरीजों को त्वरित चिकित्सा सेवा मिले, इसके लिए सदर अस्पतालों से लेकर अनुमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों , प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को चौबीसों घंटे पूरी क्षमता के साथ संचालित करने को कहा गया है. हर संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों, एएनएम, जीएनएम, फार्मासिस्टों और लैब टेक्नीशियनों की पर्याप्त उपस्थिति सुनिश्चित करने के सख्त आदेश दिए गए हैं.
जीवनरक्षक दवाओं और मेडिकल किट्स का पर्याप्त भंडारण अनिवार्य
- दवाएं एवं घोल: ओआरएस एवं जिंक टैबलेट, पैरासिटामोल, आवश्यक एंटीबायोटिक्स, एंटी-मलेरियल दवाएं और जीवनरक्षक इंजेक्शन.
- जांच किट्स: डेंगू और मलेरिया जांच किट, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट.
- इमरजेंसी सामग्री: इंट्रावेनस फ्लूड (नॉर्मल सैलिन, रिंगर लैक्टेट, डीएनएस), एंटी-स्नेक वेनम ऑक्सीजन सिलेंडर और आवश्यक वैक्सीन.
