18 जून को दिखेगा 56 का दम या रेडिशन ब्लू की किलेबंदी का असर, राज्यसभा की एक सीट सुरक्षित, दूसरी पर खेला होने के आसार

Ranchi: राजनीति में जब आंकड़े कम और उम्मीदें ज़्यादा हों, तो रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की एंट्री होती है. झारखंड की दो राज्यसभा सीटों...

Ranchi: राजनीति में जब आंकड़े कम और उम्मीदें ज़्यादा हों, तो रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की एंट्री होती है. झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए शह और मात का खेल शुरू हो चुका है. मुकाबला त्रिकोणीय है, दावे 100% के हैं. एनडीए विधायकों की घेराबंदी होटल रेडिसन ब्लू में हो चुकी है. भाजपा को भरोसा है कि कभी-कभी ऐसा अवसर आता है, तो उधर सत्ताधारी गठबंधन का दावा है कि जिसके पास संख्या बल है, उसे किसी ब्लू होटल या ब्लेम गेम की फिक्र करने की जरूरत नहीं है.

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कभी कभी इस तरह का आता है अवसरः डॉ प्रदीप वर्मा

चुनावी गणित में पीछे दिख रहा एनडीए खेमा किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग या चमत्कार की उम्मीद में है. भाजपा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने इसे बेहद दार्शनिक अंदाज में पेश करते हुए कहा, कभी-कभी इस तरह का अवसर आता है, विधायक आपस में मिलजुल कर बात करेंगे. हालांकि, यह मेलजोल होटल रेडिसन ब्लू की चहारदीवारी के भीतर सुरक्षित किया गया है, जहां पूर्णिमा दास, बाबूलाल मरांडी, शत्रुधन महतो, जर्नादन पासवान, रौशनलाल चौधरी, मंजू कुमारी, राज सिन्हा, प्रदीप प्रसाद, देवेंद्र कुंवर, कुमार उज्जवल, सत्येंद्रनाथ तिवारी, निर्मल महतो, नवीन जायसवाल और नीरा यादव समेत एनडीए के दिग्गज विधायक रणनीति बनाने में जुटे हैं.

कांग्रेस का तंज: संख्या नहीं तो बोरो कैंडिडेट क्यों लाए

कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक अजय शर्मा ने सीधे फ्रंट फुट पर खेलते हुए भाजपा के दावों पर तंज कसा कि जिसके पास संख्या नहीं होती, वे बोरो कैंडिडेट लाते हैं. चिंता उन्हें करनी चाहिए, हमें नहीं. हमारे गठबंघन के नेता सीएम हेमंत सोरेन 56 विधायकों के साथ मजबूती से बैठे हैं. मॉक पोल की ट्रेनिंग पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई डर नहीं, बल्कि पहली बार के विधायकों को जटिल वोटिंग प्रक्रिया समझाने की एक सामान्य कवायद है.

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असली गणित: बैजनाथ राम सुरक्षित, झा और नाथवाणी में फंसा पेंच

इस पूरे चुनावी ड्रामे का सबसे दिलचस्प पहलू सीटों का समीकरण है. झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत उनके मजबूत संख्या बल के कारण बिल्कुल पक्की मानी जा रही है. असली सस्पेंस और रोमांच दूसरी सीट को लेकर है, जहां मुकाबला सीधा और कड़ा है. अब देखना यह है कि रेडिसन ब्लू की रणनीति काम आती है या गठबंधन के 56 विधायकों का चक्रव्यूह. बहरहाल झारखंड की इस सियासी शतरंज में शह मात का असली फैसला तो मतपेटी ही करेगी.

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