राज्यसभा चुनाव : क्या इस बार भी दिल्ली दरबार से चलेगा भाजपा का साइलेंट कार्ड

Ranchi : झारखंड की सियासत में भाजपा का एक खास चरित्र रहा है. पर्दे के पीछे पसीना बहाने वाले को अचानक मंच...

Ranchi : झारखंड की सियासत में भाजपा का एक खास चरित्र रहा है. पर्दे के पीछे पसीना बहाने वाले को अचानक मंच के केंद्र में ला खड़ा करना. पिछले एक दशक की सियासी बिसात पर नजर दौड़ाएं, तो दिल्ली दरबार ने झारखंड से राज्यसभा भेजने के मामले में किसी ग्लैमरस चेहरे या कद्दावर पैराशूट लैंडिंग के बजाय संगठन की भट्ठी में तपकर निकले खास कार्यकर्ताओं पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया है. यह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि भाजपा की सोची समझी रणनीति है. जिसने कई बार राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया है. अब एक बार फिर राज्यसभा की चौखट पर खड़े झारखंड के लिए भाजपा के तरकश से कौन सा तीर निकलेगा, इसे लेकर लॉबिंग से लेकर कयासों का बाजार गर्म है.

2016 से शुरू हुआ साइलेंट परफॉर्मर्स का दौर

झारखंड के राजनीतिक गलियारों में इस रणनीति की जमीन साल 2016 में तैयार हुई थी. तब तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष महेश पोद्दार को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने साफ कर दिया था, कि पार्टी संगठन के प्रति वफादारी और पर्दे के पीछे के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी. यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. इसके बाद समीर उरांव ने संगठन से निकलकर सीधे उच्च सदन का सफर तय किया. प्रदेश अध्यक्ष और संगठन की रीढ़ रहें दीपक प्रकाश को दिल्ली भेजा गया. आदित्य साहू को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का इनाम मिला. प्रदीप वर्मा ने हाल ही में इस सिलसिले की सबसे नई और मजबूत कड़ी बनें.

एक दिलचस्प रिकॉर्ड

झारखंड गठन के बाद से अब तक भाजपा के कोटे से कुल 14 नेता राज्यसभा की दहलीज लांघ चुके हैं. इनमें सिर्फ एसएस अहलुवालिया ही एकमात्र ऐसे कद्दावर नेता रहे, जिन्हें दो बार राज्यसभा जाने का गौरव हासिल हुआ. बाकी हर बार भाजपा ने नए और सांगठनिक चेहरे को मौका देकर सबको हैरान किया है.

इस बार की सियासी गोटियों में पांच नाम सबसे तेजी से तैर रहे 

  • दीपक प्रकाश : सांगठनिक अनुभव और बेदाग छवि के कारण रेस में हमेशा आगे रहने वाले नेताओं में से एक.
  • राकेश प्रसाद : संगठन के भीतर एक मजबूत और रणनीतिक पकड़ रखने वाले चेहरे के रूप में उभर रहे हैं.
  • बालमुकुंद सहाय : पार्टी के पुराने सिपाही और समर्पित कार्यकर्ता, जो दशकों से सांगठनिक ढांचे को सींच रहे हैं.
  • अमर बाउरी : सदन से लेकर सड़क तक पार्टी की मुखर आवाज और दलित चेहरे के रूप में एक मजबूत विकल्प.
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