Prashant Sharma

Hazaribagh : जिला में बार-बार बच्चों के गायब होने और कुछ दिन बाद शव मिलने की घटना से जिला वासियों में दहशत है. ताजा घटना कटकमदाग क्षेत्र के कूद गांव में किराए पर मकान लेकर रहने वाले यूपी निवासी के दो बच्चे शहर के इंद्रपुरी चौक से लापता हो गए. पांच दिन बाद लापता 14 वर्षीय बच्ची तमन्ना का शव सिंदूर पंचायत भवन के पास नाले से बरामद हुआ है. जबकि कुछ घंटों बाद उसी स्थान पर स्थित एक कुएं से उसके चार वर्षीय भाई रिजवान का शव पुलिस ने बरामद किया. हालांकि पुलिस ने अब तक दोनों मामलों के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. दोनों घटनाओं से लोगों के मन में डर है कि आखिर बच्चें सुरक्षित कहां है. लोग जिला में किसी गिरोह के सक्रिय होने या साइको किलर जैसी धारणाओं पर चर्चा कर रहे है.
पौता हत्याकांड : जब तीन बच्चे गायब हुए और तीनों की मिली लाश
पौता जंगल कांड में तीन बच्चे अचानक लापता हो गए थे. कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला. बाद में तीनों बच्चों के शव बरामद हुए और मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया. सबसे बड़ी बात यह रही कि शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि बच्चे कहां गए, किसने उन्हें उठाया और हत्या का उद्देश्य क्या था. यही वजह रही कि यह मामला लंबे समय तक ब्लाइंड मर्डर बना रहा. आज भी लोगों के मन में यह सवाल मौजूद है कि यदि शुरुआती घंटों में पुलिस की प्रतिक्रिया और तेज होती तो क्या कुछ जानें बच सकती थीं.
सिंदूर कांड : प्राथमिकी दर्ज होने से पहले बच्चों की मौत हो गयी
अब तमन्ना और उसके छोटे भाई का मामला सामने आया है. पहले दोनों भाई बहन गायब हुए. परिवार ने पुलिस को समय पर सूचना दी . मगर पुलिस कार्रवाई के बजाय पीड़ित परिवार को कभी कटकमदाग तो कभी लोह सिंघना थाना की दौड़ाते रही. जब तक प्राथमिकी दर्ज की जाती तब तक बच्चों की मौत हो चुकी थी. हत्या का कारण स्पष्ट नहीं है. अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. दोनों मामलों में पीड़ित मासूम बच्चे हैं. दोनों में शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट दुश्मनी या मकसद सामने नहीं आया.
लोगों के मन में उठ रहे सवाल
दोनों ही घटनाएं लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर रहा है. जहां लोगों संदेह है कि दोनों घटनाओं के बीच कोई समानता है. हालांकि अपराध विज्ञान के विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी घटना को सीरियल किलिंग या साइको किलर से जोड़ने के लिए कई ठोस मानदंड होते हैं. अपराध की शैली, पीड़ितों का चयन, घटनास्थल का पैटर्न, अपराधी का मनोवैज्ञानिक व्यवहार, घटनाओं के बीच संबंध. फिलहाल पुलिस जांच कर जारी है.
बच्चों के लापता होने पर शुरूआती 48 घंटे महत्वपूर्ण
इन दोनों घटनाओं से बच्चों के लापता होने और ऐसी घटनाओं पर पुलिस की कारवाई पर कई सवाल खड़े होते है. जब कोई बच्चा लापता होता है, तब शुरुआती 24 से 48 घंटे सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इसी दौरान खोजबीन, तकनीकी निगरानी और अंतर जिला अलर्ट से कई मामलों में बच्चों को सुरक्षित बरामद किया जाता है. लेकिन अक्सर परिवारों की शिकायत रहती है कि गुमशुदगी को शुरू में उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता. पौता हत्याकांड और सिंदूर घटना दोनों में पुलिस की कार्यशैली संतुष्ट नहीं पायी गयी. दोनो ही मामलों में पुलिस ने शुरूआती जांच में लापरवाही बरती.
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