Ajay Dayal
Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची, जिसे स्मार्ट सिटी बनाने का सपना दिखाया जा रहा है. वह असल में डेथ ट्रैप बनकर रह गई है. नगर निगम की फाइलों में विकास की इबारत लिखी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर की सड़कों के किनारे बने खुले नाले अब शहरवासियों के लिए यमराज का द्वार बन चुके है. हर साल मानसून आता है, मासूमों को निगलता है, निगम के अधिकारी घड़ियाली आंसू बहाते है, मीटिंगों का नाटक होता है और फिर सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है. यह महज संयोग नहीं, बल्कि रांची नगर निगम की आपराधिक लापरवाही का एक ऐसा सिलसिला है, जिसने कई परिवारों को ताउम्र न भरने वाला घाव दिया है. वहीं, शनिवार को हुई बारिश ने पूरे जनजीवन को झकझोर कर रख दिया. जहां हर सड़क पूरी तरह से जलमग्न हो गये.

विकास के नाम पर मौत का कुआं
राजधानी के 26 ऐसे संवेदनशील पॉइंट है, जहां नाले खुले पड़े है और मौत हर पल घात लगाए बैठी है. हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणियों और बार-बार की फटकार के बावजूद निगम प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती. निगम की कार्यशैली का आलम यह है कि जानलेवा नालों को ढंकने के बजाय वे बांस की रद्दी बैरिकेडिंग लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते है. क्या एक बांस की लाठी मासूमों की जान बचा सकती है? यह प्रश्न आज हर उस मां के दिल में है जिसने अपनी संतान को इन गंदे नालों की भेंट चढ़ते देखा है.

निगम की बहानेबाजी का अंतहीन दौर
जब भी कोई बड़ा हादसा होता है तो निगम के अधिकारी और वार्ड पार्षद फंड की कमी का रोना रोकर अपनी जवाबदेही से किनारा कर लेते है. अगर मरम्मत संभव नहीं है, तो उन क्षेत्रों को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जाता? निगम की यह संस्कृति ही पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों लोगों की मौत की मुख्य वजह बनी है. मीटिंगों में दावों का अंबार लगाया जाता है, लेकिन बारिश की पहली फुहार ही निगम के खोखले विकास की पोल खोल देती है. झारखंड में सिर्फ रांची ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्से भी इस दंश को झेल रहे है. 2 अक्टूबर 2023 की ही घटना लें, जब राज्य भर में बारिश के दौरान नाले में बहने, दीवार गिरने और वज्रपात से आठ लोगों ने दम तोड़ दिया.

खून से सनी नालों की दास्तान
• फलक अख्तर का काल : 24 जुलाई 2019 की वह मनहूस तारीख, जब हिंदपीढ़ी की 5 साल की मासूम फलक ट्यूशन जाने के दौरान खुले नाले में समा गई. 9 किलोमीटर तक बहने के बाद उसका शव मिला. उस दिन निगम की लापरवाही ने एक घर का चिराग बुझा दिया था.
• हजारीबाग का युवक, जो कभी नहीं मिला : 21 अगस्त 2022 को कोकर के खोरहा टोली पुल से एक बाइक सवार युवक नाले के तेज बहाव में बह गया. आलम यह था कि उस युवक का शव तक बरामद नहीं हुआ. परिवार को उसकी याद में पुतले का अंतिम संस्कार करना पड़ा. इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या हो सकता है?
• हातमा का देव प्रसाद राम : 2 अक्टूबर 2023 को हातमा सरईटांड़ पुलिया पर एक और ज़िंदगी मौत के हवाले हो गई. दुकान से घर लौट रहा 28 वर्षीय युवक नाले में गिरा और दो किलोमीटर दूर उसका शव मिला.
• मो. फरहान : जनवरी 2026 में कांटाटोली की मौलाना आजाद कॉलोनी में दो साल का मो. फरहान खेलते हुए नाले में बह गया. मां की चीखें और उसे बचाने की जद्दोजहद आज भी शहर के ज़हन में है. क्या दो साल के बच्चे का जीवन इतना सस्ता है कि निगम उसे एक ढक्कन तक मुहैया नहीं करा सकता.
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