Ranchi : सालों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे पुलिस पदाधिकारियों के सीनियरिटी को लेकर सवाल उठ रहे है. पुलिस विभाग की रीढ़ माने जाने वाले सहायक अवर निरीक्षक (ASI) कोटि के कर्मियों की राज्य वरीयता सूची से जुड़ा है. आरोप है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी मेमो नंबर 1284/पी. (दिनांक 24 दिसंबर 2025) में नियमों को ताक पर रखकर सूची जारी किया गया है, जिससे सालों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे सामान्य ASI रैंक के कर्मियों की सीनियरिटी पूरी तरह से गड़बड़ा गई है.

क्या है पूरा मामला और क्यों उठ रहे सवाल ?
पीड़ित पुलिसकर्मियों का आरोप है, कि पुलिस मुख्यालय ने नियम-विरुद्ध तरीके से रीडर कैडर और आशुलिपिक के कर्मियों को सामान्य ASI की राज्य वरीयता सूची में जबरन कन्वर्जन करके जोड़ दिया है. इस अप्रत्याशित कदम से जो कर्मी सालों से सीनियरिटी लिस्ट (Seniority List) में ऊपर थे, वे अचानक नीचे खिसक गए हैं. कर्मियों ने इसे सीधे तौर पर वरीयता घोटाला करार दिया है.
सालों पुराने इतिहास को बदला, पहले कभी नहीं हुआ ऐसा
नाराज पुलिसकर्मियों ने आंकड़ों और पुराने आदेशों का हवाला देते हुए पुलिस मुख्यालय की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. मेमो नंबर 896/पी. (दिनांक 24 अगस्त 2017) से लेकर हाल ही में जारी मेमो नंबर 716/पी.(दिनांक 26 जून 2025) तक के इतिहास में, आज तक एक बार भी रीडर कैडर के कर्मियों की वरीयता सूची सामान्य एएसआई के साथ जारी नहीं की गई थी. दोनों कैडर हमेशा अलग रहे हैं. मेमो नंबर 1284/पी. (दिनांक 24 दिसंबर 2025) में अचानक ऐसा क्या हुआ कि नियमों को दरकिनार कर रीडर कैडर वालों को प्रत्यावर्तित कर सामान्य सूची में घुसा दिया गया?
प्रमोशन पर लगा ब्रेक 27 महीनों से एक भी लिस्ट नहीं
इस पूरे विवाद के पीछे प्रमोशन का एक बड़ा गणित और पुलिसकर्मियों का दर्द छिपा है. पुलिस मुख्यालय के ज्ञापांक 224/पी. (दिनांक 13 मार्च 2024) के जरिए कुल 1132 एएसआई स्तर के कर्मियों को सब-इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नति दी गई थी. चौंकाने वाली बात यह है कि उस बड़ी प्रोन्नति के बाद से लेकर आज तक लगभग 27 महीने बीत चुके हैं लेकिन झारखंड पुलिस में एक भी एएसआई को सब-इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन नसीब नहीं हुआ है.
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