अच्छी खबर: भारी तनाव के बीच रसोई गैस लेकर गुजरात पहुंचा जहाज ‘सिमी’, 13 मई को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के खतरनाक रास्ते से होकर गुजरा

Good news: भारत के लिए रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर अच्छी खबर आई है. मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी मालवाहक...

Good news: भारत के लिए रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर अच्छी खबर आई है. मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी मालवाहक जहाज ‘सिमी’ रविवार सुबह गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पर सफलतापूर्वक पहुंच गया. यह जहाज 13 मई को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के खतरनाक रास्ते से होकर गुजरा था. पश्चिम एशिया में पिछले 75 दिनों से जारी युद्ध की वजह से यह समुद्री मार्ग फिलहाल बेहद असुरक्षित बना हुआ है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से लगभग 20,000 टन रसोई गैस खरीदी थी, जिसे लेकर यह जहाज भारत आया है. जहाज पर सवार सभी 21 विदेशी चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं. ओमान की खाड़ी में ईरानी नौसेना के कड़े पहरे और अमेरिकी नाकेबंदी के बीच इस जहाज को सुरक्षित निकालना एक बड़ी चुनौती थी.

यह भी पढ़ें: हेग में अहम बैठक: व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत-नीदरलैंड के बीच 17 समझौते, रक्षा, सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर

रडार को चकमा देकर सुरक्षित पहुंचने में कामयाब

दुश्मन के रडार और निगरानी तंत्र को चकमा देने के लिए जहाज ने बुधवार को युद्ध क्षेत्र से गुजरते समय अपने ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (AIS) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था. इस तकनीक की मदद से जहाज रडार की नजरों में आए बिना ईरान के लारक द्वीप के पूर्व में सुरक्षित पहुंचने में कामयाब रहा.

यह 13वां जहाज जो होर्मुज पार कर भारत आया

इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए भारत सरकार के चार मंत्रालयों ने मिलकर काम किया. बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच दिन-रात चले बेहतरीन तालमेल की वजह से ही जहाज को किसी भी गोलाबारी से बचाकर सुरक्षित मार्ग दिया जा सका. मार्च की शुरुआत से अब तक इस रास्ते को पार कर भारत पहुंचने वाला यह 13वां जहाज है. इसके पीछे वियतनाम के ध्वज वाला एक और टैंकर ‘एनवी सनशाइन’ भी आ रहा है, जो न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है.

यह भी पढ़ें: सिंधू जल संधि पर भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को बताया अमान्य, कहा कोई कानूनी अस्तित्व नहीं

रसोई गैस की यह खेप भारत के लिए बहुत जरूरी

रसोई गैस की यह खेप भारत के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि युद्ध के कारण देश के ईंधन भंडार में 15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है. भारत का कच्चा तेल भंडार 10.7 करोड़ बैरल से घटकर अब 9.1 करोड़ बैरल रह गया है. इसी दबाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील भी की थी.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *