Ranchi: कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में अत्यंत सख्त रुख अपनाया है. सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि खदान में काम करने वालों का जीवन और स्वास्थ्य सबसे ऊपर है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों के हाई कोर्ट को मॉनिटरिंग का आदेश दिया था, जिसके तहत झारखंड हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की है.
हाईकोर्ट ने रिपोर्ट पर जताया असंतोष
आज मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायाधीश संजय प्रसाद की पीठ ने मुख्य कारखाना निरीक्षक को तलब किया है और उन्हें अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. हालांकि सरकार की ओर से प्रमुख कोयला खदानों और कारखानों का निरीक्षण एवं समीक्षा रिपोर्ट अदालत में पेश की गई, लेकिन अदालत ने इस पर असंतोष जाहिर किया है.
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अदालत ने सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन, अवैध खनन पर रोक, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने, ठेका मजदूरों के नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी और कल्याणकारी सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करने को लेकर प्रगति रिपोर्ट मांगी है.
