मानव-हाथी संघर्ष के समाधान पर उच्च स्तरीय बैठक, डीसी ने राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का दिया प्रस्ताव

Bokaro: जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर हाथियों की समस्या के स्थायी एवं प्रभावी समाधान तथा वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों...

Bokaro DC
मानव-हाथी संघर्ष के समाधान पर उच्च स्तरीय बैठक

Bokaro: जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर हाथियों की समस्या के स्थायी एवं प्रभावी समाधान तथा वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गुरुवार को पेटरवार फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) रवि रंजन, उपायुक्त बोकारो अजय नाथ झा, जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) नीतीश कुमार, वन पदाधिकारी संदीप शींदे सहित जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआइसीए) के प्रतिनिधि एवं प्रोजेक्ट गणेशा के विशेषज्ञ शामिल हुए.

हाथी प्रभावित क्षेत्रों का किया गया भ्रमण

बैठक से पूर्व जेआइसीए एवं प्रोजेक्ट गणेशा की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न हाथी प्रभावित क्षेत्रों एवं संयुक्त वन प्रबंधन समिति (जेएफएमसी) क्षेत्रों का भ्रमण किया. भ्रमण के दौरान मानव-हाथी संघर्ष की वर्तमान स्थिति, प्रभावित गांवों की परिस्थितियों एवं जमीनी चुनौतियों का आकलन किया गया.

मानव-हाथी संघर्ष कम करने पर हुई विस्तृत चर्चा

पेटरवार रेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई. साथ ही, वन क्षेत्रों पर निर्भर ग्रामीणों की सुरक्षा,आजीविका सुदृढ़ीकरण तथा हाथियों के सुरक्षित आवागमन को लेकर जिला प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की गई.

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में हाई मास्क लाइट लगाए गए

बैठक में जानकारी दी गई कि जिला प्रशासन द्वारा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में बी-कीपिंग (मधुमक्खी पालन), सोलर लाइट एवं हाई मास्क लाइट लगाए गए हैं, ताकि हाथियों की गतिविधियों पर नियंत्रण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इन प्रयासों से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं.

राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का दिया गया प्रस्ताव

बैठक के दौरान उपायुक्त अजय नाथ झा ने हाथी संघर्ष प्रबंधन विषय पर राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव दिया. बैठक में उपस्थित अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल संघर्ष को कम करना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों एवं हाथियों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व और तालमेल स्थापित करना होगा. सम्मेलन के माध्यम से हाथी प्रबंधन को संवेदनशील, सहभागी एवं स्वागत योग्य दृष्टिकोण के साथ विकसित करने की रूपरेखा तैयार करने पर बल दिया गया.

वन्यजीव संरक्षण-ग्रामीण विकास के संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बैठक में कहा गया कि प्रशासन, वन विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का संयुक्त प्रयास भविष्य में मानव एवं वन्यजीव दोनों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. यह पहल वन्यजीव संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी.

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