Hazaribagh: कहते हैं कि सरकार की योजनाएं समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को संबल देने के लिए बनती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है. कटकमसांडी प्रखंड क्षेत्र की कंचनपुर पंचायत से एक ऐसी कड़वी सच्चाई सामने आई है, जो सरकारी आवास योजना के दावों और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है. पंचायत के हेदलाग, गोविंदपुर और कंचनपुर गांवों में इन दिनों सरकारी आवास योजना की जमीनी हकीकत को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. आरोप है कि यहां नियम-कानूनों को ताक पर रखकर उन लोगों को आवास का लाभ दे दिया गया, जिनके पास पहले से ही पक्के मकान मौजूद हैं. वहीं दूसरी ओर, इसी पंचायत के वास्तविक जरूरतमंद बिशेश्वर साव पिछले करीब दो दशकों से जर्जर खपरौल घर में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं.

तीन चुनाव बीते, नहीं बदली बिशेश्वर की तकदीर
बिशेश्वर साव की कहानी व्यवस्था की संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण बन गई है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 15-20 वर्षों में पंचायत में तीन बार चुनाव हुए. मुखिया बदले, वार्ड सदस्य बदले, वादे बदले, लेकिन बिशेश्वर साव की स्थिति नहीं बदली. ग्रामीणों का आरोप है कि न वर्तमान और न ही पूर्व जनप्रतिनिधियों ने उनकी स्थिति पर गंभीरता दिखाई. आर्थिक तंगी से जूझ रहे बिशेश्वर साव के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह अपने दम पर एक पक्का कमरा भी बनवा सकें.
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मौसम की मार झेलने को मजबूर परिवार
बिशेश्वर साव का परिवार सालभर इस चिंता में जीता है कि कहीं जर्जर खपरौल की छत भी उनके सिर से न छिन जाए. गर्मी में लू, बरसात में टपकती छत और सर्दी की मार के बीच पूरा परिवार किसी तरह दिन काटने को मजबूर है. ग्रामीणों का कहना है कि बदहाली के बावजूद सरकारी तंत्र की नजर अब तक उन पर नहीं पड़ी है.
रसूखदारों पर मेहरबान होने का आरोप
सरकारी प्रावधानों के अनुसार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत कच्चे, जर्जर और बेघर परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है. इसके लिए पंचायत स्तर पर सर्वे और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया होती है. लेकिन कंचनपुर पंचायत में तस्वीर कुछ और दिखाई दे रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि यहां नियमों को दरकिनार कर प्रभावशाली और संपन्न लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि वास्तविक पात्र आज भी पंचायत और प्रखंड कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं.
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
अब इस मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ने लगी है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और प्रखंड विकास पदाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि हेदलाग, गोविंदपुर और कंचनपुर गांवों में आवास योजना के लाभुकों की भौतिक जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके. साथ ही मांग की गई है कि बिशेश्वर साव जैसे वास्तविक जरूरतमंदों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें.
