झारखंड में शराब दुकानों के संचालन नियमों में बदलाव: अब JSBCL संभालेगी ‘अनसेटल्ड’ दुकानों की कमान

Ranchi: राज्य सरकार के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने “झारखंड उत्पाद (मदिरा की खुदरा बिक्री हेतु दुकानों की बंदोबस्ती एवं संचालन)...

Ranchi: राज्य सरकार के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने “झारखंड उत्पाद (मदिरा की खुदरा बिक्री हेतु दुकानों की बंदोबस्ती एवं संचालन) नियमावली, 2025” में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं. बीते 28 मार्च को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब राज्य में वैसी शराब दुकानें जिनका बंदोबस्त निजी संचालकों के साथ नहीं हो पाएगा, उनका संचालन झारखंड राज्य बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) द्वारा किया जाएगा. यह नियमावली अधिसूचना जारी होने की तिथि से पूरे झारखंड में प्रभावी हो गई है. सरकार का मुख्य उद्देश्य राजस्व के नुकसान को रोकना और उन क्षेत्रों में भी शराब की उपलब्धता सुनिश्चित करना है जहां निजी संचालक रुचि नहीं दिखा रहे हैं.

अनुज्ञप्ति की अवधि और नवीकरण

संशोधित नियमों के तहत, खुदरा उत्पाद दुकानों की अनुज्ञप्तियां सामान्यतः 31 मार्च, 2030 तक की अवधि के लिए दी जाएंगी. हालांकि, ये लाइसेंस वार्षिक आधार पर प्रदान किए जाएंगे. आगामी वित्तीय वर्षों के लिए नवीकरण तभी होगा जब संचालक संतोषजनक रूप से दुकान चलाएंगे और विभाग द्वारा निर्धारित राजस्व लक्ष्य प्राप्त करेंगे. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्गत लाइसेंस 31 मार्च, 2026 तक वैध होंगे. नवीकरण के समय वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत राजस्व में कम-से-कम 10% की वृद्धि अनिवार्य की गई है.

यह भी पढ़ें : सम्राट चौधरी को बधाई देते हुए अंसारी का हमला, बोले—नीतीश का ‘पॉलिटिकल मर्डर’

प्रतिभूति राशि और ई बैंक गारंटी

दुकानों के लिए निर्धारित वार्षिक राजस्व का 5% प्रतिभूति राशि के रूप में जमा करना होगा. नए नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि अनुज्ञप्तिधारी किसी भी अनुसूचित व्यावसायिक बैंक से ई बैंक गारंटी जमा कर सकते हैं. यह गारंटी 30 सितंबर, 2030 तक मान्य होगी. ई बैंक गारंटी जमा करने पर पहले से जमा की गई नकद जमानत राशि वापस कर दी जाएगी.

अबंदोबस्त (अनसेटल्ड) दुकानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

यदि किसी जिले में दुकानें चार प्रयासों के बाद भी निजी तौर पर बंदोबस्त नहीं हो पाती हैं, तो उनके संचालन की जिम्मेदारी JSBCL को सौंपी जाएगी. जेएसबीसीएल इन दुकानों का संचालन ‘नो प्रॉफिट-नो लॉस’ के आधार पर करेगी. इन दुकानों के लिए न्यूनतम प्रत्याभूत राजस्व की कोई बाध्यता नहीं होगी.
दुकानों से होने वाली कुल आय में से उत्पाद कर, वैट और अन्य खर्चों की कटौती के बाद शेष राशि सीधे सरकारी खजाने में जमा की जाएगी.

यह भी पढ़ें : दमन से नहीं, बातचीत से हल निकलेगा : श्रमिक आंदोलन पर भाकपा ने सरकार को घेरा

संचालन हेतु कर्मियों का चयन और बुनियादी ढांचा

जेएसबीसीएल द्वारा संचालित दुकानों के लिए परिसर का चयन जिला उपायुक्त की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति करेगी. प्रत्येक दुकान के लिए एक ‘दुकान प्रभारी’ (कुशल श्रमिक दर पर) और ‘दुकान सहायक’ (अकुशल श्रमिक दर पर) का चयन किया जाएगा. इनका भुगतान दैनिक पारिश्रमिक के आधार पर होगा. दुकानों की सुरक्षा के लिए आवश्यकतानुसार गृह रक्षा वाहिनी के जवानों की तैनाती की जाएगी. दुकानों के सुचारू संचालन और निगरानी के लिए परिवहन एजेंसी, कैश कलेक्शन एजेंसी और ऑडिटर्स की नियुक्ति जेएसबीसीएल द्वारा की जा सकती है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *