झारखंड पुलिस की फ्लॉप होती महत्वाकांक्षी योजनाएं, शोर-शराबे के साथ शुरुआत, पर जमीन पर जल्द ही दम तोड़ दिया अभियान

SAURAV SINGH रांची: झारखंड पुलिस विभाग में पिछले कुछ समय से एक अजीब सी परिपाटी देखने को मिल रही है किसी भी...

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रांची: झारखंड पुलिस विभाग में पिछले कुछ समय से एक अजीब सी परिपाटी देखने को मिल रही है किसी भी नए अभियान या कार्यक्रम की शुरुआत तो पूरे जोर शोर साथ हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद वे ठंडे बस्ते में चले गए. जनता को उम्मीद की किरण दिखाने वाले ये कार्यक्रम अब फाइलों में दफन होते दिख रहे हैं.

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जन शिकायत समाधान कार्यक्रम: उम्मीदें जगीं और फिर सो गई

आम जनता और पुलिस के बीच की दूरी को कम करने के लिए 16 अप्रैल 2025 को राज्य के सभी 24 जिलों में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम’ का भव्य शुभारंभ हुआ था. राज्यभर के थानों थानों में स्टॉल लगाकर महिला उत्पीड़न, जमीन विवाद और अन्य आपराधिक मामलों का मौके पर ही निपटारा करना उद्देश्य था. राज्य स्तर पर केवल चार बार ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा सका.
शुरुआत में पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने का जो दावा किया गया था, वह अब धीमा पड़ गया है. शिविर लगने बंद हो गए हैं और फरियादी एक बार फिर पुराने ढर्रे पर चक्कर काटने को मजबूर हैं.

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महिला पुलिस सम्मेलन: एक बार की चमक के बाद छाई खामोशी

महिला पुलिसकर्मियों के सशक्तिकरण और उनकी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 23 अगस्त 2024 को डोरंडा स्थित जैप-1 के शौर्य सभागार में दो दिवसीय राज्य स्तरीय महिला पुलिस सम्मेलन’ संपन्न हुआ था. घोषणा की गई थी कि महिला पुलिस की समस्याओं और सुझावों पर गौर करने के लिए ऐसा आयोजन हर साल किया जाएगा. बड़े-बड़े वादों के बावजूद यह सम्मेलन केवल एक बार होकर रह गया. महिला सशक्तिकरण की बातें अब केवल विभागीय फाइलों तक सीमित नजर आ रही हैं.

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जमीन माफियाओं के खिलाफ SIT: दबंगों पर कार्रवाई या केवल कागजी खानापूर्ति?

रांची में जमीन माफियाओं का आतंक किसी से छुपा नहीं है. फर्जी कागजात और बाहुबल के दम पर जमीन हड़पने के बढ़ते मामलों को देखते हुए तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता ने सात अगस्त 2024 को एक सात सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था. रांची में दर्ज जमीन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों की गहन समीक्षा करना, लंबित अनुसंधान को पूरा करना और फाइनल रिपोर्ट वाले संदिग्ध केसों की दोबारा जांच करना था. इस एसआईटी के गठन से भू-माफियाओं में हड़कंप तो मचा था, लेकिन जितनी तेजी से यह टीम सक्रिय हुई थी, उतनी ही खामोशी से इसके कामकाज पर ब्रेक लग गया.

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