Palamu: बरसात का मौसम जहां किसानों के लिए खुशहाली लेकर आता है, वहीं मेदिनीनगर नगर निगम के वार्ड संख्या-17 के हजारों लोगों के लिए यह मौसम वर्षों से परेशानी का कारण बना हुआ है. रेड़मा से चियांकी को जोड़ने वाली समदा आहर–फनेश्वर बांध सड़क जर्जर हालत में है. करीब तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क पर गड्ढे, कीचड़ और फिसलन के कारण स्कूली बच्चों, मजदूरों, महिलाओं, बुजुर्गों और नौकरीपेशा लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है. कई लोग फिसलकर गिर जाते हैं, जबकि कीचड़ के कारण राहगीरों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
फनेश्वर बांध टूटने से बढ़ी मुश्किलें
तीन वर्ष पूर्व फनेश्वर बांध टूट जाने के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई. रेड़मा और चियांकी के बीच की दूरी लगभग 10 किलोमीटर तक बढ़ गई. वहीं पांच से छह गांवों के लोगों, मजदूरों और आम नागरिकों का दैनिक आवागमन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ. वर्षों से उपेक्षित इस सड़क की समस्या लगातार गंभीर होती गई, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई.
दीपक तिवारी ने की पहल, शुरू हुआ मरम्मत कार्य
जब व्यवस्था की उदासीनता के कारण लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती रहीं, तब झामुमो युवा नेता एवं समाजसेवी दीपक तिवारी आगे आए. उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) के परियोजना निदेशक से मुलाकात कर समदा आहर सड़क को तत्काल चलने योग्य बनाने का अनुरोध किया. उनकी पहल के बाद बड़े वाहनों के माध्यम से सड़क पर स्टोन चिप्स और अन्य आवश्यक सामग्री गिराकर गड्ढों को भरने तथा कीचड़ और फिसलन से राहत दिलाने का कार्य शुरू कराया गया. इससे स्थानीय लोगों में राहत की उम्मीद जगी है.
‘यह सड़क हजारों लोगों की जीवनरेखा है’
दीपक तिवारी ने बताया कि रांची रोड से समदा आहर, छेचानी टोला और फनेश्वर बांध होते हुए चियांकी तक जाने वाला यह मार्ग दर्जनों गांवों की जीवनरेखा है. वर्षों से मरम्मत नहीं होने और बांध टूटने के कारण यह सड़क सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन गई है. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक न तो बांध की मरम्मत हो सकी और न ही सड़क का स्थायी निर्माण शुरू हो पाया.
सिंचाई व्यवस्था भी हो रही प्रभावित
उन्होंने कहा कि फनेश्वर बांध की बदहाल स्थिति के कारण सिंचाई और जलसंग्रह का महत्वपूर्ण स्रोत भी लगातार प्रभावित हो रहा है. इससे किसानों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है. सड़क की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ देर वहां खड़े रहने पर लोग फिसलते, गिरते और किसी तरह संभलते हुए नजर आते हैं. सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं, मजदूरों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है.
उपायुक्त और महापौर से की स्थायी समाधान की मांग
दीपक तिवारी ने कहा कि समदा आहर सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारों लोगों के रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन से जुड़ी जीवनरेखा है. उन्होंने पलामू उपायुक्त से फनेश्वर बांध की शीघ्र मरम्मत और समदा आहर सड़क के स्थायी निर्माण की मांग की. साथ ही मेदिनीनगर की महापौर से भी इस दिशा में विशेष पहल करने का आग्रह किया, ताकि नगर निगम में शामिल नए क्षेत्रों की उपेक्षा समाप्त हो सके.
स्थानीय लोगों ने जताया आभार
स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपक तिवारी की पहल से वर्षों से निराश लोगों के बीच उम्मीद की नई किरण जगी है. उनका मानना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ें, तो यह सड़क एक बार फिर हजारों लोगों की जीवनरेखा बन सकती है. लोगों ने कहा कि यह पहल केवल सड़क मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना का भी उदाहरण है.
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