Sahibganj: जिले में मांस और मछली के बाद अब तेजी से दूध उत्पादन भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है. जिले में रोजाना करीब 80 हजार लीटर दूध की खपत हो रही है. झारखंड सरकार द्वारा झारखंड मिल्क फेडरेशन के तहत साहिबगंज सदर, बरहेट, पतना, बरहरवा, राजमहल सहित अन्य प्रखंडों में दूध सीतक केंद्र खोले गए हैं, जहां पशुपालक प्रतिदिन हजारों लीटर दूध बेच रहे हैं.

जिले में 1771 महिला-पुरुष पशुपालक झारखंड मिल्क फेडरेशन से जुड़े हैं, जो प्रतिदिन 14393.94 लीटर दूध केंद्रों तक पहुंचा रहे हैं. जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दूध उत्पादन से नई ताकत मिल रही है और पशुपालन सैकड़ों परिवारों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का बड़ा माध्यम बन चुका है. इससे किसानों को प्रतिदिन 1000 से 2000 रुपये तक की आय हो रही है.
दूध क्रय केंद्रों से किसानों को मिल रहा लाभ
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र खुलने से न केवल दूध के उचित दाम मिल रहे हैं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है. गांव के पशुपालकों के लिए दूध क्रय केंद्र किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहे हैं. मेघा दूध क्रय केंद्र खुलने से किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है और दूध उत्पादक किसानों की होटलों व दुकानदारों पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है.
पहले किसानों को दूध बेचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब यह समस्या दूर हो रही है. जिले की डेयरी में प्रतिदिन 14393.93 लीटर दूध पहुंच रहा है, जबकि उत्पादन क्षमता 8 लाख लीटर प्रतिदिन बताई जा रही है. वहीं पशुपालक जिले के बड़े होटल, रेस्टोरेंट एवं चाय दुकानों में भी सीधे दूध बेच रहे हैं.
सरकार खोल रही है संग्रहण केंद्र
झारखंड सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रहण केंद्र खोले जा रहे हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लीटर दूध पहुंच रहा है. पशुपालकों को दूध पहुंचाने के लिए मुख्य केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि गांव में बने मिनी सेंटर में ही दूध जमा किया जाता है. इसके बाद दूध को मुख्य केंद्र तक पहुंचाया जाता है और वहां से प्यूरिफाई कर साहिबगंज स्थित मेघा दूध सेंटर भेज दिया जाता है.
समय पर भुगतान से बढ़ा भरोसा
जिले में पहले पशुपालकों को अपना दूध स्थानीय होटलों, चाय दुकानदारों और बिचौलियों को बेचना पड़ता था. उचित मूल्य और समय पर भुगतान बड़ी समस्या थी. मेधा डेयरी के आने से किसानों को उधारी के चक्र से मुक्ति मिली है. आधुनिक मशीनों से दूध की जांच होने से किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है. डेयरी द्वारा सीधे बैंक खातों में भुगतान और प्रति लीटर 5 रुपये बोनस मिलने से पशुपालकों की क्रय शक्ति भी बढ़ी है.
चाय और दूध उत्पादों की बढ़ी मांग
कोरोना काल के बाद लोगों में दूध उत्पादों के प्रति रुझान बढ़ा है. मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत दुधारू गाय उपलब्ध कराकर सरकार ने पशुपालकों को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया है. चिकित्सकों द्वारा प्रोटीन युक्त भोजन लेने की सलाह के बाद दूध और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ी है.
दूध की खपत चाय, पनीर, घी, खोवा, क्रीम, लस्सी और दही के रूप में हो रही है. गर्मियों में दही और लस्सी की मांग बाजारों में काफी बढ़ जाती है. खासकर शादी और अन्य आयोजनों में इन उत्पादों की खपत अधिक होती है. जिले में केवल चाय के लिए प्रतिदिन 25 हजार लीटर से अधिक दूध की खपत हो रही है.
कई प्रखंड अब भी केंद्र से वंचित
जिले के बरहेट, पतना, राजमहल और साहिबगंज में दूध सीतक केंद्र खोले गए हैं, लेकिन बोरियो, मंडरो, तालझारी और बरहरवा जैसे प्रखंड अब भी इससे वंचित हैं. इन क्षेत्रों के पशुपालकों को मजबूरी में दूध कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है और वे अब भी बिचौलियों पर निर्भर हैं.
क्या कहते हैं जिला मेधा डेयरी पदाधिकारी
इस संबंध में राजीव रंजन ने कहा कि जिले में 1700 से अधिक महिला-पुरुष पशुपालक जुड़े हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 14393 लीटर दूध डेयरी को प्राप्त हो रहा है. उन्होंने कहा कि स्थानीय बाजार से अधिक कीमत पर दूध खरीदा जा रहा है और पशुपालकों से सरकार की योजनाओं का लाभ लेने की अपील की.
जिले में प्रखंडवार आंकड़ा (लीटर)
- बरहेट – 67 सदस्य – 509.2712 लीटर
- पतना – 115 सदस्य – 1317.67 लीटर
- साहिबगंज – 1538 सदस्य – 11619.538 लीटर
- राजमहल – 51 सदस्य – 1043.523 लीटर
