सरायकेला:’प्रश्न पत्र कठिन था, फिजिक्स के प्रोफेसर नहीं’ सिंहभूम कॉलेज प्राचार्य ने 50% फेल छात्रों पर दी सफाई

Sraikela:चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के प्रशासनिक भवन सिंहभूम कॉलेज चाण्डिल (कोल्हान विश्व विद्यालय) में इंटर साइंस के खराब रिजल्ट के बाद अब नई...

Sraikela:चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के प्रशासनिक भवन सिंहभूम कॉलेज चाण्डिल (कोल्हान विश्व विद्यालय) में इंटर साइंस के खराब रिजल्ट के बाद अब नई समस्या खड़ी हो गई है. कॉलेज प्राचार्य डॉ० सुनील मुर्मु के अनुसार यहां इंटरमीडिएट की पढ़ाई अब नहीं होगी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस साल फेल हुए 110 छात्र-छात्राएं फॉर्म फिल -अप कहां से करेंगे और इंटरमीडिएट की परीक्षा कैसे दे पाएंगे? सिंहभूम कॉलेज चांडिल में JAC बोर्ड इंटरमीडिएट (10+2) साइंस संकाय का परीक्षा परिणाम बेहद खराब रहा. लगभग 220 विद्यार्थियों में से करीब 110 छात्र-छात्राएं असफल घोषित हुए हैं. जबकि पहले यहां 75% रिजल्ट होता था. इस बार सीधे 50% छात्र फेल हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र के छात्रों एवं अभिभावकों में चिंता है.

यहां के बच्चे कहां जाएंगे? विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश रंजन महतो ने गहरी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह पूरे अनुमंडल के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है. चांडिल अनुमंडल में यही एक प्रमुख कॉलेज है, जहां ईचागढ़, नीमडीह, कुकड़ू एवं चांडिल प्रखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल राज्य से भी हजारों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं. सहज जन लोक कल्याण जागृति संगठन ने कहा कि कॉलेज प्राचार्य के अनुसार अब यहां इंटरमीडिएट की पढ़ाई नहीं होगी. ऐसे में फेल हुए 110 बच्चों का क्या होगा? वे कंपार्टमेंट या अगले साल की परीक्षा का फॉर्म कहां से भरेंगे? संगठन ने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. अभिभावकों का कहना है कि अगर इंटर बंद हो रहा है तो फेल छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए या तो इन्हें नजदीकी कॉलेज में शिफ्ट किया जाए या सिंहभूम कॉलेज से ही फॉर्म भरने की सुविधा दी जाए.

सिंहभूम कॉलेज चांडिल में इंटर साइंस के 50% छात्रों के फेल होने पर प्राचार्य डॉ० सुनील मुर्मु ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने खराब रिजल्ट के लिए प्रश्न पत्र का कठिन होना और फिजिक्स में प्रोफेसर की कमी को मुख्य कारण बताया. छात्रों के फेल होने के संबंध में प्राचार्य डॉ० सुनील मुर्मु ने कहा कि कॉलेज का लगभग 50 प्रतिशत रिजल्ट आया है. रिजल्ट खराब होने का मुख्य कारण प्रश्न पत्र का अत्यधिक कठिन होना रहा. साथ ही उन्होंने कहा कि छात्र नियमित रूप से क्लास में उपस्थित नहीं होते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई है.प्राचार्य ने स्वीकार किया कि फिजिक्स विषय में प्रोफेसर की कमी भी एक बड़ी समस्या रही. लैब और थ्योरी दोनों प्रभावित हुए.

इंटर की पढ़ाई बंद 

तीन-चार महीने ही हुए हैं ,जब उनसे पूछा गया कि अभिभावकों का कहना है कि बच्चे नियमित रूप से कॉलेज आते हैं, तो क्या कॉलेज प्रशासन ने कभी अभिभावकों के साथ बैठक की या छात्रों की उपस्थिति को लेकर कोई विशेष पहल की, तब प्राचार्य ने जवाब दिया कि उन्हें कॉलेज में कार्यभार संभाले अभी केवल तीन-चार महीने ही हुए हैं और उन्हें पूरे मामले को समझने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला है.’इंटर बंद हो रहा, JAC तय करेगा’: फेल हुए 110 विद्यार्थियों के भविष्य पर प्राचार्य ने कहा कि इस संबंध में वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सकते, क्योंकि अब कॉलेज में इंटरमीडिएट की पढ़ाई बंद होने जा रही है. उन्होंने कहा कि फेल हुए छात्र दोबारा परीक्षा दे पाएंगे या नहीं, यह पूरी तरह जैक बोर्ड के निर्णय पर निर्भर करेगा. कॉलेज के पास इसका कोई अधिकार नहीं है.

 

           

अभिभावकों में आक्रोश:

प्राचार्य के बयान के बाद अभिभावकों में नाराजगी है. सहज जन लोक कल्याण जागृति संगठन ने कहा कि जब इंटर बंद ही करना था तो एडमिशन क्यों लिया गया? 110 बच्चों का एक साल बर्बाद हो गया. अब फॉर्म कहां से भरेंगे? संगठन ने DC से जांच की मांग की है.

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