Akshay kumar jha
Ranchi : झारखंड में एसटी सीट जिसकी, सत्ता उसकी. इसी फॉर्मूले पर काम करते हुए जेएमएम ने दूसरी बार सत्ता हासिल की. और अगर बीजेपी का ऐसा ही प्रदर्शन रहा तो तय है कि फिर से एक बार जेएमएम बीजेपी को पटखनी दे सकता है. लेकिन ऐसा सिर्फ झारखंड में देखने को मिलता है. बाकी राज्यों में बीजेपी एसटी सीटों पर बेहतरीन प्रदर्शन करती है. दूसरे राज्यों में हुए हाल के चुनावों में बीजेपी ने एसटी सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया है. इसका नतीजा भी मिला है. जिस किसी राज्य में बीजेपी ने एसटी सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया है, वहां वो सत्ता पर काबिज होने में कामयाब हुई है. तो, सवाल यह उठता है कि आखिर झारखंड में बीजेपी एसटी सीटों पर फिसड्डी क्यों साबित हो जाती है. ऐसा भी नहीं बोला जा सकता है कि बीजेपी के पास आदिवासी चेहरा नहीं है. 2019 का चुनाव भले ही रघुवर दास के नेतृत्व में लड़ा गया हो, लेकिन 2024 में तो बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन जैसे तमाम बड़े चेहरों के साथ बीजेपी मैदान में उतरी थी. तो फिर क्यों नतीजा 27 बनाम 1 का क्यों रहा (झारखंड में एसटी सीटों की संख्या 28 है).
घटता ही जा रहा है ग्राफ
2019 विधानसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी के पास सिर्फ दो एसटी अरक्षित सीटें थी. खूंटी और तोरपा. लेकिन 2024 में बीजेपी यह दोनों सीटें हार गयी. इस चुनाव में बीजेपी को सिर्फ एक ही एसटी सीट मिली. वो थी सरायकेला. जीतने वाले और कोई नहीं बल्कि चंपाई सोरेन थे. जिन्होंने जेएमएम से बागी तेवर अपनाने के बाद बीजेपी का कमल थामा था. यहां तक कि घाटशिला में हुए उपचुनाव में भी बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी.
दूसरे राज्यों में एसटी सीटों के दम पर जीतती है बीजेपी
– पश्चिम बंगाल
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीएमसी का सफाया कर दिया. राज्य में अनुसूचित आरक्षित कुल 16 सीटें है, जिसमें सभी में बीजेपी ने जीत हासिल की है. कुमारग्राम, कलचीनी, मदारीहाट, मल, नागराकाटा, फानसिडेवा, तपन, हबीबपुर, संदेशखाली, नायग्राम, केशियारी, बिनपुर, बंदवान, मानबाजार, रानीबांध, रायपुर. इसी तरह जंगल महल (पुरुलिया, बांकुरा, झारग्राम) में बीजेपी ने सभी प्रमुख सीटें जीतीं, जिसमें कुड़मी-महतो समुदाय की नाराजगी और आदिवासी मतों का झुकाव निर्णायक रहा.
– छत्तीसगढ़
2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आदिवासी बहुल 29 अनुसूचित जनजाति (एसटी) सीटों में से 17 पर जीत हासिल कर शानदार वापसी की. 2018 के मुकाबले (3 सीटें) यह प्रदर्शन बहुत बेहतर था, जबकि कांग्रेस 25 से घटकर 11 सीटों पर आ गयी.
– ओडिशा
2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों पर ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए बीजू जनता दल के गढ़ को ध्वस्त कर दिया. 2019 में, बीजेडी ने 33 एसटी विधानसभा सीटों में से 18 पर जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी को 11 सीटें मिली थीं. वर्ष 2024 में, बीजेपी ने इन आरक्षित सीटों के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया, जो राज्य में सरकार बदलने का मुख्य कारण बना. बीजेपी ने मयूरभंज जिले की सभी सीटों पर जीत हासिल की, जहां से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आती हैं. बीजेपी ने कुल 147 में से 78 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया, जिसमें एसटी सीटों की अहम भूमिका रही.
– मध्यप्रदेश
2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 24 पर जीत दर्ज की, जो 2018 के मुकाबले 8 सीटें अधिक हैं. यह शानदार प्रदर्शन आदिवासी वोटों को लुभाने की रणनीति और केंद्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के कारण संभव हुआ.
टिप्पणी
तो ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर झारखंड में बीजेपी दूसरे राज्यों की तरह प्रदर्शन क्यों नहीं कर पाती है. क्या नेतृत्व क्षमता की कमी है या फिर जेएमएम एक बेहतरीन रणनीति के साथ चुनाव में उतरता है. आने वाले चुनाव के लिए बीजेपी को एक रणनीति बनाकर चुनाव में उतरना होगा. नहीं तो सत्ता सुख से बीजेपी को बाहर ही रहना होगा.
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