Ranchi : बदलते दौर में अधिकारियों को सिर्फ दिमाग से ही नहीं, बल्कि दिल से भी सोचने और काम करने की जरूरत है. नंगे पांव उम्मीद लेकर सरकारी दफ्तर पहुंचने वाले अंतिम व्यक्ति के दर्द को समझें और यह सुनिश्चित करें कि वह खाली हाथ न लौटें. यह संवेदनशील आह्वान राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने किया. वे रांची के सर्ड सभागार में आई गॉट कर्मयोगी पोर्टल पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं.

प्रखंड और अंचल कार्यालय ही सरकार का चेहरा
कार्यशाला में राज्यभर के उप समाहर्ता सह प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रखंड और अंचल कार्यालय ही जनता के बीच सरकार का चेहरा होते हैं. मईया सम्मान योजना, अबुआ आवास और सर्वजन पेंशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की सफलता अधिकारियों की संवेदनशीलता पर टिकी है. उन्होंने मिशन कर्मयोगी को कार्यक्षमता विकास और नवाचार (इन्नोवेशन) का बेहतरीन जरिया बताते हुए कहा कि खुद को अपग्रेड करने की कोई उम्र नहीं होती. आज झारखंड में परिस्थितियां बदली हैं. अब लोग राशन-पेंशन के लिए भटकने को विवश नहीं हैं, बल्कि अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय सीमा के भीतर पाना उनका हक है.
मुख्यमंत्री के निर्देशों का हो सख्ती से पालन
मौसम के मिजाज को देखते हुए मंत्री ने कार्यशाला में मौजूद सभी बीडीओ को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों की याद दिलाई. उन्होंने सख्त हिदायत दी कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए हर हाल में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएं. प्रखंड कार्यालयों, पंचायत भवनों के साथ-साथ प्रमुख चौक-चौराहों पर भी आम जनमानस के लिए पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए.
एआई और तकनीक से आसान होगा काम
इससे पूर्व, सर्ड के निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि यह आयोजन महज एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि समय की बचत और कार्य को सरल बनाने का माध्यम है. उन्होंने अधिकारियों से कार्यक्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने की अपील की. कार्यशाला में विशेषज्ञ निधि ने मिशन कर्मयोगी पोर्टल से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण दिया और अधिकारियों की शंकाओं का समाधान किया.
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