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हजारीबाग NHAI की सड़क परियोजनाओं का ‘रिकॉर्ड’ गायब, RTI खुलासे से मचा हड़कंप, बिल-वाउचर देने में छूटे पसीने

Hazaribagh: हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत हुए खुलासे ने कई...

Hazaribagh: हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत हुए खुलासे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमिटी के आरटीआई सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरआर मेहता द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में NHAI द्वारा कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है. मामला लगभग 1612 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं से जुड़ा है.

2015 से 2026 तक की मांगी गई थी जानकारी

 

आरआर मेहता ने वर्ष 2015 से 2026 तक सड़क निर्माण, निर्माण सामग्री की खरीद, सीएसआर फंड, पेड़ों की कटाई और प्रतिपूरक वृक्षारोपण से संबंधित जानकारी मांगी थी. शुरुआती जवाब में NHAI ने कहा था कि रिकॉर्ड काफी अधिक हैं और आवेदक कार्यालय आकर उनका निरीक्षण कर सकते हैं. इसके बाद विभाग ने बरही-हजारीबाग फोरलेन, बरही-कोडरमा फोरलेन, चोरदाहा-गोरहर सिक्सलेन, हजारीबाग बाईपास और सर्विस रोड समेत पांच प्रमुख परियोजनाओं की सूची उपलब्ध कराई, जिनकी कुल लागत लगभग 1612.18 करोड़ रुपये बताई गई.

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सामग्री खरीद के रिकॉर्ड पर सवाल

 

आरटीआई में निर्माण कार्यों में प्रयुक्त गिट्टी, बालू, सीमेंट और अन्य सामग्रियों के आपूर्तिकर्ताओं, बिल-वाउचर और चालान की जानकारी मांगी गई थी. जवाब में NHAI ने कहा कि विक्रेता संबंधी विवरण, बिल-वाउचर और चालान कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं. इस जवाब के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी परियोजनाओं में भुगतान और ऑडिट प्रक्रिया किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी की गई.

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15,125 पेड़ कटे, लेकिन वृक्षारोपण का रिकॉर्ड नहीं

 

NHAI ने स्वीकार किया कि विभिन्न परियोजनाओं के दौरान कुल 15,125 पेड़ों की कटाई की गई. हालांकि पेड़ों की कटाई में उपयोग किए गए वाहनों और चालकों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई. वहीं प्रतिपूरक वृक्षारोपण के संबंध में विभाग ने बताया कि पौधे संवेदक (ठेकेदार) द्वारा लगाए गए हैं, इसलिए उनके स्थान, खर्च और वर्तमान स्थिति का रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध नहीं है.

अधूरी जानकारी देने का आरोप

आरटीआई आवेदक आरआर मेहता ने NHAI के जवाब पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि निरीक्षण के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गईं. उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि संबंधित दस्तावेज वास्तव में उपलब्ध नहीं हैं, तो उनके नष्ट किए जाने से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए.

कई सवालों के जवाब बाकी

मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि सड़क परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय और पर्यावरणीय रिकॉर्ड का संरक्षण किस प्रकार किया गया. अब निगाहें NHAI के वरीय अधिकारियों और संबंधित मंत्रालय पर हैं कि वे इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है.

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