Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट परिसर (धुर्वा) में फुटबॉल ग्राउंड के प्रस्तावित निर्माण को लेकर वकीलों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है. एडवोकेट्स एसोसिएशन, झारखंड हाईकोर्ट ने इस प्रस्ताव के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए झारखंड के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है.
बिना परामर्श के लिया गया फैसला
एसोसिएशन की ओर से 19 जुलाई को जारी इस विरोध पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार के भवन निर्माण विभाग (भवन प्रमंडल सं. 02, रांची) ने हाईकोर्ट परिसर में फुटबॉल ग्राउंड बनाने की प्रक्रिया शुरू की है. एसोसिएशन ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि हाई कोर्ट परिसर की जमीन के इस्तेमाल से जुड़ा इतना महत्वपूर्ण निर्णय बिना एडवोकेट्स एसोसिएशन से परामर्श किए ले लिया गया. जबकि एसोसिएशन इस परिसर का प्राथमिक हितधारक है.
500 अतिरिक्त चैंबर और बैठने की उचित व्यवस्था करने की मांग
- एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि जब तक वकीलों की मूलभूत सुविधाओं का समाधान नहीं होता, तब तक फुटबॉल ग्राउंड का निर्माण नहीं होना चाहिए. पत्र में मुख्य रूप से कई मांगें रखी गई है.
- परिसर के भीतर कम से कम 500 अतिरिक्त एडवोकेट चैंबर का निर्माण कराया जाए.
- नव-नामांकित और जूनियर वकीलों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, जो वर्तमान में किसी चैंबर या बैठने की जगह के अभाव में कठिन परिस्थितियों में काम करने को मजबूर है.
काफी समय से लंबित हैं मूलभूत मांगें
एसोसिएशन का कहना है कि वकीलों के लिए चैंबर और बैठने की जगह की मांग काफी पुरानी और जायज है. इसके लिए पूर्व में भी कोर्ट प्रशासन और सरकार को कई बार ज्ञापन दिया गया है लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. एसोसिएशन के अनुसार, जब वकीलों की बुनियादी जरूरतें अनसुनी है, तो ऐसे में प्रशासनिक प्राथमिकताओं, फंड और जमीन को फुटबॉल ग्राउंड की तरफ मोड़ना पूरी तरह से अनुचित और अन्यायोचित है.
मुख्य न्यायाधीश से किया गया अनुरोध
- एसोसिएशन के साथ उचित विचार-विमर्श होने तक फुटबॉल ग्राउंड निर्माण परियोजना को स्थगित रखा जाए.
- संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे सबसे पहले हाईकोर्ट परिसर में 500 अतिरिक्त चैंबर और बैठने की जगह के निर्माण को प्राथमिकता दें.
- परिसर की जमीन के उपयोग से संबंधित कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले एसोसिएशन को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए.
