Ranchi: झारखंड में डायन प्रथा जैसी कुप्रथा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर अब सख्त और ठोस कार्रवाई की जरूरत है. इसी मुद्दे पर आज रांची स्थित झारखंड न्यायिक अकादमी के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में आयोजित हाई-लेवल कोलोकीयम में न्यायपालिका के शीर्ष अधिकारियों ने सिस्टम की खामियों और जमीनी सच्चाई पर खुलकर बात रखी. कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने साफ शब्दों में कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज की गहरी संरचनात्मक विफलता का परिणाम है. उन्होंने कहा कि संविधान महिलाओं को समानता और गरिमा का अधिकार देता है, लेकिन हकीकत में ये अधिकार आज भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं.
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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा- झारखंड में डायन प्रथा अमानवीय
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने झारखंड में प्रचलित डायन प्रथा को सीधे तौर पर अमानवीय और लैंगिक हिंसा का खतरनाक रूप बताते हुए कहा कि यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि सत्ता, असमानता और पितृसत्तात्मक सोच की उपज है. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक संभव नहीं है. कोलोकीयम में यह भी साफ किया गया कि न्याय का मतलब सिर्फ अपराधियों को सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन देना भी है. विधिक सेवा संस्थाओं को गांव-गांव तक पहुंच बनाकर पीड़ितों को कानूनी मदद, जागरूकता और मुआवजा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभानी होगी.

“सही व्यक्ति को सही जिम्मेदारी मिलने से ही न्याय व्यवस्था में तेजी और प्रभावशीलता आएगी”
वहीं न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने में सबसे बड़ी बाधा कानून की कमी नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन की कमजोरी है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन मौजूद होने के बावजूद अगर जिला स्तर पर संस्थाएं सक्रिय नहीं होंगी, तो हालात में सुधार संभव नहीं है. उन्होंने “फायर फाइटिंग” मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिस्टम को रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव बनाना होगा. सही व्यक्ति को सही जिम्मेदारी मिलने से ही न्याय व्यवस्था में तेजी और प्रभावशीलता आएगी.
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कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे मौजूद
कार्यक्रम में झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनक, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद समेत कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे. पहले सत्र का धन्यवाद ज्ञापन महिला, बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने किया, जबकि दूसरे सत्र में कानूनी और तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से अपने विचार रखे. इस दौरान विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं, दुर्घटना पीड़ित परिवारों और ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही महिला को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई.
