Ranchi: झारखंड तीन सीनियर आइएफएस अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोपों के बाद सरकार ने उच्चस्तरीय जांच की कवायद तेज कर दी है. वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अवर सचिव मितरंजु कुमार ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को कड़ा पत्र लिखकर मामले की जांच रिपोर्ट अविलंब विभाग को सौंपने का निर्देश दिया है. यह कार्रवाई सहायक वन संरक्षक अविनाश कुमार परमार द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद शुरू हुई है. इसमें राज्यपाल सचिवालय और भारत सरकार के वन मंत्रालय ने भी हस्तक्षेप करते हुए संज्ञान लिया है.
इन अफसरों के खिलाफ जांच के आदेश
आरएन मिश्रा (क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, हजारीबाग),ममता प्रियदर्शी (वन संरक्षक, प्रादेशिक अंचल, हजारीबाग) मौन प्रकाश (वन प्रमंडल पदाधिकारी, हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल) जूनियर अधिकारी की शिकायत पर दिल्ली तक मची खलबली. यह पूरा विवाद हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडलके सहायक वन संरक्षक अविनाश कुमार परमार के शिकायत के बाद शुरू हुआ. उन्होंने साल 2025 में अगस्त से लेकर अक्टूबर के बीच विभाग को कई पत्र लिखे, जिसमें इन तीनों सीनियर अफसरों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए थे. राज्यपाल सचिवालय ने नवंबर 2025 और भारत सरकार के केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में पत्र जारी कर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की जरूरत बताई.
निगरानी विंग करेगी जांच
सरकार ने इस पूरे मामले की कमान मुख्य वन संरक्षक (निगरानी) को सौंपी है. इससे पहले भी विभाग द्वारा नवंबर और दिसंबर 2025 में जांच के लिए पत्र और स्मार पत्र (रिमाइंडर) भेजे गए थे, लेकिन अब तक इसकी अनुपालन रिपोर्ट विभाग को नहीं मिली है. केंद्र सरकार और लोकभवन के कड़े रुख को देखते हुए, अवर सचिव ने अब प्रधान मुख्य वन संरक्षक को निर्देश दिया है कि वे अपने स्पष्ट मंतव्य के साथ जांच प्रतिवेदन विभाग को बिना किसी देरी के तुरंत उपलब्ध कराएं.
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