Ranchi: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मेधावी बच्चों के सपनों को मुख्यमंत्री की दूरगामी सोच और आकांक्षा योजना के पंख लग गए हैं. जेईई मेन 2026 के परिणामों में इस योजना के तहत कोचिंग ले रहे 42 छात्रों ने सफलता का परचम लहराकर पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है. निजी कोचिंग संस्थानों की भारी-भरकम फीस के बिना, झारखंड सरकार की इस मुफ्त कोचिंग व्यवस्था ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उत्कृष्टता साबित कर दी है.
प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं
इस वर्ष के परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. योजना के छात्र शुभम कुमार बर्नवाल ने 99.83 पर्सेंटाइल हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है. कृष्णा कुमार ने 98.98, विनीत कुमार ने 96.83, सुनील कुमार यादव ने 96.63 और आकाश कुमार ने 96.14 पर्सेंटाइल हासिल किया है. दर्जनों छात्रों ने 90 पर्सेंटाइल से अधिक अंक प्राप्त कर जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई किया है, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.
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शिक्षा विभाग में हर्ष का माहौल
इस सफलता पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद और शिक्षा पदाधिकारी बादल राज ने सभी सफल छात्र-छात्राओं को बधाई दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह परिणाम झारखंड सरकार की उस प्रतिबद्धता का नतीजा है, जिसके तहत राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े छात्र को भी डॉक्टर और इंजीनियर बनने का समान अवसर दिया जा रहा है.
क्या है आकांक्षा योजना?
झारखंड सरकार द्वारा 2016-17 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मेडिकल (नीट) और इंजीनियरिंग (जेइइ) जैसी कठिन परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी करवाना है.
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क्या है इसकी खासियत?
• सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्रों का चयन.
• पूरी तरह निशुल्क उच्च स्तरीय कोचिंग.
• छात्रों के लिए मुफ्त रहने और खाने की व्यवस्था.
• विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन.
