प्रदेश कांग्रेस ने की मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाने की मांग, बोर्ड निगम के रिक्त पदों को भरने के लिए चयन समिति गठित

Ranchi: राज्य में चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के मोर्चे पर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. इसी...

State Congress demands extension of deadline for voter list revision, formation of selection committee to fill vacant board and corporation posts

Ranchi: राज्य में चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के मोर्चे पर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. इसी कड़ी में सोमवार को रांची स्थित कांग्रेस भवन में एक उच्चस्तरीय संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने संयुक्त रूप से सरकार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. नेताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की तय समयसीमा व्यावहारिक नहीं है और यदि इसमें तुरंत संशोधन नहीं किया गया, तो लाखों योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे.

रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज

झारखंड में पार्टी को धार देने की तैयारी शुरू कर दी है. प्रभारी के राजू ने झारखंड कांग्रेस के अंतर्गत विभिन्न राज्य बोर्डों, निगमों और बीस सूत्री कार्यक्रमों में रिक्त पड़े पदों को भरने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की अध्यक्षता में एक समर्पित चयन समिति का गठन किया गया है, जिसमें सीएलपी लीडर, उपनेता और सभी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व कार्यकारी अध्यक्ष शामिल होंगे. यह समिति निष्ठा, सेवा, सामाजिक समावेशिता और क्षेत्रीय संतुलन को आधार बनाकर नामों का चयन करेगी, जिसे अंतिम मुहर के लिए आलाकमान के पास भेजा जाएगा.

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1.13 करोड़ फॉर्म लंबित

कांग्रेस नेताओं द्वारा साझा किए गए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. झारखंड में कुल 2.64 करोड़ मतदाता हैं, लेकिन गंभीर लॉजिस्टिक और तकनीकी बाधाओं के चलते अभी तक 1.13 करोड़ गणना प्रपत्र डिजिटाइज ही नहीं हो सके हैं. शहरी क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक दयनीय बनी हुई है. इसके अतिरिक्त, राज्यभर में लगभग 47.41 लाख मतदाता अनमैप्ड श्रेणी में हैं, जिनमें बोकारो (41%), जमशेदपुर पूर्वी (51%) और कांके (33%) जैसे इलाकों में हर तीसरा मतदाता सूची से बाहर होने के कगार पर है. पार्टी का साफ कहना है कि अंतिम समय में जल्दबाजी दिखाने से डेटा में भारी विसंगतियां आ रही हैं, जो लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बड़ा खतरा है. धनबाद में डिजिटलीकरण मात्र 27.2% रांची में डिजिटलीकरण मात्र 28.1% और झरिया में डिजिटलीकरण मात्र 30.8% हुआ है.

दोहरी मार झेल रहा झारखंड का मतदाता

वर्तमान में सक्रिय मानसूनी वर्षा, जलमग्न ग्रामीण मार्ग और दुर्गम भौगोलिक स्थितियां घर-घर सत्यापन के कार्य में सबसे बड़ा अवरोध बन चुकी हैं. दूरदराज के आदिवासी बहुल और वन क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारियों का पहुंचना लगभग असंभव सा हो गया है. दूसरी ओर, आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों या जिलों में पलायन करने वाले कृषि मजदूर व श्रमिक वर्ग ऑनलाइन प्रक्रिया से अनजान होने के कारण ‘एबीएसडी’ श्रेणी में धकेले जा रहे हैं. कांग्रेस ने पुरजोर मांग की है कि ऐसे प्रवासियों और वंचितों को अपनी प्रविष्टि सुधारने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए.

“एक भी नागरिक का हक छीना तो बर्दाश्त नहीं”

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को औपचारिक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि गणना प्रपत्र जमा करने की अंतिम तिथि में कम से कम 15 दिनों का विस्तार किया जाए. नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि चूंकि राज्य में इस वक्त कोई आसन्न चुनाव नहीं है, इसलिए कुछ अतिरिक्त दिनों की छूट देने से किसी प्रकार की प्रशासनिक असुविधा नहीं होगी.

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पंचायत स्तर पर विशेष शिविर और ग्राम सभाओं के उपयोग पर जोर

• विशेष सुविधा शिविर: प्रत्येक मतदान केंद्र और पंचायत स्तर पर हेल्प डेस्क व शिविर आयोजित किए जाएं.
• ग्राम सभाओं का उपयोग: आगामी 15 अगस्त को आयोजित होने वाली ग्राम सभा की बैठकों का उपयोग आम जनता को प्रारूप मतदाता सूची के बारे में जागरूक करने के लिए किया जाए.

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